निदेशक

 

निदेशक, राष्‍ट्रीय नाट्य विद्यालय 

वामन केन्‍द्रे 

कला स्‍नातक तथा डॉ. अम्‍बेडकर मराठवाड़ा विश्‍वविद्यालय, औरंगाबाद से नाट्यकला में एक वर्षीय प्रोफिशिएन्‍सी सर्टीफिकेशन कोर्स प्राप्‍त रानावि से स्‍नातक प्रख्‍यात रंगमंच व्‍यक्तिव प्राप्‍त प्रो. वामन केन्‍द्रे, रानावि में निदेशक का पदभार ग्रहण करने से पूर्व मुंबई विश्‍वविद्यालय के रंगमंच कला अकादेमी के प्रोफे़सर व निदेशक पद पर 2003 से 2013 तक कार्यरत रहे ।

 तीस वर्षों के दीर्घ शिक्षण अनुभव के साथ-साथ आप रंगमंच के विविध विषयों की देश व विदेश (अमेरिका, मॉरिशस) में 250 से अधिक नाट्य कार्यशालाओं का संचालन व अध्‍यापन कर चुके हैं। केरल के लोक व अनुष्‍ठानिक रंगमंच पर व्‍यवहार जनित शोधकार्य करने के अलावा रंगमंच विकास केन्‍द्र, राष्‍ट्रीय प्रदर्शन कला केन्‍द्र, मुंबई में आप साढ़े नौ वर्ष तक शोध सहायक के रूप में कार्य कर चुके हैं। आप राष्‍ट्रीय प्रदर्शन कला केन्‍द्र, मुंबई विश्‍वविद्यालय और रंगपीठ, मुंबई जैसे संस्‍थानों की प्रशासनिक व संगठनात्‍मक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। आप अनेक परामर्श समितियों व शासकीय निकायों के प्रमुख सदस्‍य रहे हैं, जिनमें विज़न प्‍लान कमेटी (रानावि), राज्‍य मराठी विकास संस्‍था (महाराष्‍ट्र सरकार) सलाहकार समिति, नाट्य विभाग (राजस्‍थान विश्‍वविद्यालय, जयपुर), शासकीय परिषद् तथा कार्यकारी समिति (पश्चिम क्षेत्र सांस्‍कृतिक केन्‍द्र, उदयपुर), शैक्षिक परिषद (मुंबई विश्‍वविद्यालय), विज़न प्‍लान कमेटी (गोवा राज्‍य सरकार), आकाशवाणी व दूरदर्शन की सलाहकार समिति (भारत सरकार), सोसायटी ऑफ गवर्निंग काउंसिल (एस.आर.एफ.टी.आई.आई.)। आप योजना आयोग, भारत सरकार प्रदर्शनकारी कलाओं की ग्‍यारहवीं पंचवर्षीय योजना, योजना आयोग, भारत सरकार के भी सदस्‍य हैं।

 आपके द्वारा निर्देशित नाट्य प्रस्‍तुतियों में जुल्‍वा (2005), मध्‍यम व्‍यायोग (2004), जानेमन (रानावि रंगमंडल, 2002), टेम्‍पट मी नौट (एन.सी.पी.ए., 1992), नटि गोति (1990), गधे की बारात (एस.आर.सी., 1988), लड़ी नज़रिया (रानावि, 1994), सैंया भये कोतवाल तथा राजदर्शन (इप्‍टा, मुंबई – 1985 एवं 1986) आज भी समाज के ऐसे तबको के संवेदनशील चित्रण के लिए मील का पत्‍थर समझी जाती हैं, जिनके विषय में कोई बात नहीं करना चाहता। आपके नाटक ‘चार दिवस प्रेमछे’ का 1000वां मंचन – 1 मई, 2009 को हुआ। महाराष्‍ट्र सरकार की वर्ष  1989 की व्‍यावसायिक नाट्य स्‍पर्धा में श्रेष्‍ठ नाटक एवं श्रेष्‍ठ निर्देशन के तीनों पुरस्‍कार जीतने के आपके कीर्तिमान को आज तक कोई अन्‍य निर्देशक तोड़ नहीं पाया है। रंगमंच के क्षेत्र में आपकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए आपको कई पुरस्‍कारों/सम्‍मानों से नवाज़ा गया है, जिनमें प्रमुख हैं – रंगमंच निर्देश्‍न के लिए भारत के राष्‍ट्रपति द्वारा प्रदत्त राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार, (संगीत नाटक अकादमी 2012), प्रथम मनोहर सिंह स्‍मृति पुरस्‍कार, रंगमंच कला के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट बहुमुखी योगदान के लिए रानावि व संस्‍कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वर्ष 2004 से दिया जाने वाला सम्‍मान), मुंबई मराठी ग्रन्‍थ संग्रहालय पुरस्‍कार (1989), महाराष्‍ट्र सरकार राज्‍य पुरस्‍कार (8 बार), सहयोग फ़ाउंडेशन पुरस्‍कार (1999), मराठवाड़ा गौरव पुरस्‍कार (2002), महाराष्‍ट्र टाइम्‍स पुरस्‍कार (2006), नाट्य दर्पण पुरस्‍कार (1989, 1992, 1996), पद्मश्री दया पवार स्‍मृति पुरस्‍कार (2007) तथा वर्ष 2013 में पिया बावरी के लिए श्रेष्‍ठ संगीत का राज्‍य पुरस्‍कार अन्‍य पुरस्‍कारों में शामिल हैं। 

 

पूर्व निदेशक

 

  1. श्री सतू सेन – 1959-61
  2. श्री ई. अल्‍काज़ी – 1962-77
  3. श्री ब. व. कारंत – 1977-82
  4. श्री बी. एम. शाह – 1982-84
  5. प्रो. मोहन महर्षि – 1984-86
  6. श्री रतन थियाम – 1987-88
  7. प्रो. कीर्ति  जैन – 1988-95
  8. प्रो. रामगोपाल बजाज – 1995 – सितंबर 2001
  9. प्रो. देवेन्‍द्र राज अंकुर – 2001 – जुलाई 2007
  10. डॉ. अनुराधा कपूर – 2007 – अप्रैल 2013 

 

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